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Published on 21 Nov, 2023
Updated on 21 Nov, 2023
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4 min Read
Written by Care Health Insurance
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आज-कल प्रदूषण और स्मॉग के कारण घर से बाहर निकलने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ या सांस फूलने की समस्या होने लगी है। घर से बाहर निकलने पर आंखों में जलन हो रही है। ज्यादातर लोगों को सुबह-शाम गले में खराश और खांसी की समस्या हो रही है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ युवाओं में भी गले की समस्या देखने को मिल रही है। वैसे सांस फुलने की समस्या कई और कारणों से भी हो सकती है, जैसे- मोटापा, एंजाइटी, कैंसर, टीबी, हार्ट की समस्या, एनिमिया इत्यादि। आइए जानते हैं, प्रदूषण और स्मॉग से होने वाली शारीरिक परेशानियों को कैसे दूर करें।
प्रदूषण या स्मॉग से बचने के निम्नलिखित तरीके है:-
AQI के अनुसार अपने प्लान को बनाएं - यदि आपके स्थान पर AQI का स्तर ज्यादा है, तो अपने प्लान को ऐसे बदलाव करें की आपको ज्यादा बाहर गहरी सांस ना लेनी पड़े। यदि आपके क्षेत्र में AQI रेड या ऑरेंज है तो बाहर प्राणायाम या योगा करने से बचें। यदि जरूरी है तो बाहर मास्क लगाकर ही निकले। संभवत एयर प्यूरीफायर का प्रयोग करें।
जितना संभव हो सके घर में प्रदूषण कम करने की कोशिश करें - अपने घर को ऐसे व्यवस्थित करें की धुआं या स्मॉग आपके घर के अंदर ना आ सके। एयर प्यूरिफाइंग प्लांट्स लगाएं। घर में किसी तरह की चीजों को जलाने से बचें, जैसे- अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला, मोमबत्ती, लकड़ी आदि।
डस्टिंग करने या झाड़ू लगाने से बचें - सांस लेने की समस्या धूल-कण से और भी ज्यादा बढ़ जाती है। इसके बदले में आप सफाई के लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह आपके लिए ज्यादा सुविधाजनक और फायदेमंद हो सकता है।
वायु प्रदूषण या स्मॉग से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती है।
खांसी या सांस लेने में दिक्कत - प्रदूषित हवा में सांस लेने से सांस की समस्या होती है। हवा में मौजूद धूल-कण और नुकसानदेह कैमिकल इस समस्या को और भी बढ़ा देते हैं। इससे बचने के लिए बाहर कम से कम निकलने का प्रयास करें और जरूरी होने पर मास्क का इस्तेमाल करें।
आंखों में जलन - दूषित हवा में कुछ देर तक काम करने या बाहर रहने से आंखों में जलन की समस्या हो सकती है। आंखों से पानी आना या आंखे लाल होने जैसेी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसका इलाज आप घर पर आसानी से कर सकते हैं, लेकिन यदि यह समस्या बढ़ जाती है तो आपको तत्काल डॉक्टर से परामर्श करने की जरूरत होती है।
नाक बंद होना या नाक में जलन महसूस होना - हवा यदि खराब है तो यह आंखों के अलावा नाक की समस्या को भी जन्म दे सकती है। ऐसे में नाक में जलन या नाक बंद होने की समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए आप जब भी घर से बाहर निकले, मास्क अच्छे से लगाएं।
गले में दर्द या खराश होना - ज्यादा समय तक दूषित वायु और वातावरण में रहने से गले की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में हवा के केमिकल्स गले को संक्रमित करते हैं और गले में दर्द और खराश की समस्या भी हो सकती है।
त्वचा पर खुजली और दाने की समस्या होना - स्किन रैशेज या खुजली होना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन कई बार यह दूषित हवा के कारण भी हो सकता है। आप इसे घरेलू इलाज के द्वारा ठीक कर सकते हैं।
बाल झड़ने की समस्या - वायू प्रदूषण में मौजूद केमिकल बालों पर भी हानिकारक प्रभाव डालते हैं। इससे बालों में रूखापन होना या बाल झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती है। ऐसे में यदि आपके बाल ज्यादा झड़ते हैं तो उचित इलाज की जरूरत होती है।
प्रदूषण से बचाव के घरेलू उपाय निम्नलिखि है-
फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करें। प्रदूषण से बचाव के लिए सबसे पहले जरूरी है प्रतिक्षा प्रणाली का मजबूत होना और इसके लिए विटामिन सी का सेवन आपके लिए बहुत जरूरी है। विटामिन सी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो आपके इम्यून सिस्टम को मजबूत रखते हैं। इसलिए ऐसे मौसम में पालक, हरी पत्तेदार सब्जियां, संतरा, मौसमी फल इत्यादि का सेवन आवश्य करें।
तुलसी चाय या अदरक वाली चाय का सेवन करें। इसमें मौजूद तत्व न सिर्फ आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है बल्की प्रदूषण और स्मॉग के असर को भी कम करता है।
ऑलिव ऑयल का सेवन करें। श्वसनतंत्र को सही रखने के लिए ऑलिए ऑयल बहुत फायदेमंद होता है। यह आपको कई सारी बीमारियों से बचाने का काम करती है और आपके प्रतिरक्षा प्रणाली को भी मजबूत रखती है।
स्मॉग के कारण घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत से लेकर आंख जलने तक कई तरह की परेशानियां आ रही है। बहुत लोगों को गले में खराश और खांसी की समस्या हो रही है। बच्चों से बुजुर्गों तक सभी परेशान है। वैसे सांस की समस्या के लिए कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे- मोटापा, एंजाइटी, कैंसर, टीबी, हार्ट डिजीज, एनिमिया इत्यादि।
स्मॉग और प्रदूषण से बचने के लिए आप AQI के अनुसार अपने प्लान को बना सकते हैं, मतलब जहां AQI लेवल ज्यादा हो वहां जाने से बचें। एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। जितना संभव हो सके प्रदूषण कम करने की कोशिश करें। ज्यादा AQI लेवल वाले क्षेत्रों में योगा और प्रणयाम करने से बचें। घर में अगरबत्ती, धूपबत्ती, कोयला आदि जलाने से बचें। डस्टिंग करने या झाड़ू लगाने से बचें, बदले में वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें।
वायु प्रदूषण से खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, बाल झड़ना, नाक बंद, त्वचा पर खुजली या रैशेज इत्यादि। स्मॉग और प्रदूषण से बचने के लिए तुलसी या अदरक के चाय का सेवन करें। खाने में ऑलिव ऑयल का प्रयोग करें, संतरा, पालक, मौसमी फल इत्यादि जैसे विटामिन-सी युक्त फलों और सब्जियों का सेवन करें।
ऐसे में यदि आप सांस संबंधी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो यह घातक बीमारी बन सकती है और आपके जेब के खर्चों पर भारी पड़ सकती है। इन बीमारियों के भीरी खर्चों से बचने के लिए आप स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) भी करा सकते हैं। जहां आपको सिर्फ बीमारी के खर्चों को कवर किया जाता है बल्की एंबुलेंस सेवा के कैशलेस सुविधा भी प्रदान की जाती है। आप केयर हेल्थ के सामान्य स्वास्थ्य बीमा को खरीद सकते हैं और बीमित्त को मिलने वाले लाभ का लुफ्त उठा सकते हैं।
>> जाने: सांस लेने में दिक्कत हो तो क्या करें
डिस्क्लेमर: किसी भी तरह के सांस संबंधी समस्या होने पर डॉक्टर से परामर्श करें। हेल्थ इंश्योरेंस के प्लान की सुविधाएँ, लाभ और कवरेज अलग-अलग हो सकते हैं। कृपया ब्रोशर, सेल्स प्रोस्पेक्टस, नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें।
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